नशाखोरी की समस्या (Problem of Drug Addiction)

You are currently viewing नशाखोरी की समस्या (Problem of Drug Addiction)

नशा नाश का द्वार हैयह कहावत वास्तविकता को दर्शाती है जो व्यक्ति नशा करता है वो धीरेधीरे अपने आप को पतन की और ले जाता है और उसके शरीर में अनेक भयंकर बीमारियाँ अपना घर बना लेती है जो आगे जाकर एक दिन उसका नाश कर देती है. नशीली पदार्थो का सेवन एक विश्वव्यापी समस्या है जिससे कमोबेश विश्व के सभी देश झूझ रहे हैं। नशा एक अभिशाप है। यह एक ऐसा मादक और उत्तेजक पदार्थ है, जिसके प्रयोग से व्यक्ति अपनी स्मृति और संवेदनशीलता अस्थाई रूप से खो देता है। समाज में नशे का चलन आदि काल से रहा है। आधुनिक युग में पाश्चात्य संस्कृति से नशे को नए रूप मिले हैं, जिनमे विशेष रूप से चरस, गांजा, भांग, अफीम, स्मैक, हेरोइन जैसी ड्रग्स उल्लेखनीय हैं। शराब भी इसी प्रकार का एक नशा है। 

संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) द्वारा ड्रग्स एंड क्राइम पर 25 जून 2020 को जारी की नवीनतम विश्व ड्रग रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में दुनिया भर में लगभग 26.9 करोड़ लोगों ने ड्रग्स का इस्तेमाल किया, जो कि 2009 की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है, जबकि 3.5 करोड़ से अधिक लोग नशीली दवाओं के उपयोग के विकारों से पीड़ित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी, सीमित शिक्षा और सामाजिक भेदभाव नशीली दवाओं के उपयोग को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं । 

यूएनओडीसी रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला पदार्थ कैनबिस था, जिसका अनुमानित 19.2 करोड़ लोग इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, ओपियोइड अर्थात दर्दनिवारक नशीली दवा जैसे मॉर्फिन, हेरोइन, ट्रामाडोल, ऑक्सीकोडोन, मेथाडोन आदि सबसे हानिकारक हैं, क्योंकि पिछले एक दशक में, इससे होने वाली मौतों की कुल संख्या में 71 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें पुरुषों में 63 प्रतिशत की तुलना में महिलाओं में 92 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

दवा की गंभीर समस्या वाले पांच देश निम्नलिखित हैं:

  1. ईरान : देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अफीम (हेरोइन सहित) और क्रिस्टल मेथ जैसी दवाओं के उपयोग की समस्या से झूझ रहा है।
  2. अफगानिस्तान : दुनिया के सर्वोच्च अफीम उत्पादक इस देश में 3.5 करोड़ की आबादी में से 10 लाख लोग नशे के आदी हैं।
  3. रूस : रूसी अधिकारियों का कहना है कि देश में 10 लाख हेरोइन उपयोगकर्ता हैं, हालांकि अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह संख्या 20 लाख के करीब है।
  4. संयुक्त राज्य अमेरिका : यह दुनिया के अवैध नशीले पदार्थों के शीर्ष उपयोगकर्ताओं में से एक है। 2.2 करोड़ उपयोगकर्ताओं के साथ मारिजुआना सबसे अधिक जबकि 0.38 करोड़ लोग नुस्खे के माध्यम वाली दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं।
  5. ग्रेट ब्रिटेन: ग्रेट ब्रिटेन में 1.5 करोड़ से अधिक लोग नशीली दवाओं का सेवन करते हैं जबकि लगभग 30 लाख इसके नियमित उपयोगकर्ता हैं।

भारत की स्थिति

भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने एम्स के नेशनल ड्रग डिपेंडेंट ट्रीटमेंट सेण्टर के माध्यम से भारत में नशे की स्थिति पर एक सर्वे करवाया है। इस सेण्टर ने जनवरी 2019 में एक रिपोर्ट दी जिसका शीर्षक है “मैग्नीट्यूड ऑफ़ सब्स्टेन्स यूज़ इन इंडिया” जिसके अनुसार भारत में लगभग 28 करोड़ लोग किसी न किसी मादक पदार्थ का सेवन कर रहे हैं। कुल जनसंख्या का लगभग 14.6% अर्थात 16 करोड़ लोग शराब और 12 करोड़ लोग अन्य मादक पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। 

ड्रग्स एंड क्राइम पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय और भारत के सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि शराब, भांग, अफीम और हेरोइन भारत में दुरुपयोग की जाने वाली प्रमुख दवाएं हैं। ब्यूप्रेनोर्फिन(Buprenorphine), प्रोपोक्सीफीन(propoxyphene) और हेरोइन (heroin) सबसे अधिक इंजेक्शन वाली दवाएं हैं। नशे के रुप में एडहेसिव व पेट्रोल का इस्तेमाल भी व्यापक समस्या रूप ले चुकी है। भारत में, लगभग 2.8 प्रतिशत आबादी (3.1 करोड़) के भांग उपयोगकर्ताओं में से 1.2 प्रतिशत (1.3 करोड़) इसके अवैध उत्पादों, गांजा और चरस का उपयोग करते हैं। इनकी सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश, पंजाब, सिक्किम, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में है। भारत में प्रत्येक वर्ष लगभग 20 लाख तथा लगभग 5 लाख लोग शराब के कारण मर जाते है। नशाखोरी से जुड़ी समस्याओं के चलते 2004 से 2013 के बीच में आत्महत्या करने वाले लोगों की संख्या में 149 प्रतिशत वृद्धि देखी गई है।

भारत मे दुनिया भर मे औसत से तीन गुना अधिक ओपिओइड का उपयोग होता है। एम्स के सर्वेक्षण से पता चलता है कि 2018 में, लगभग 2.1 प्रतिशत आबादी (लगभग 2.3 करोड़) ने ओपिओइड का इस्तेमाल किया था। कुल ओपिओइड उपयोगकर्ताओं में से, लगभग 77 लाख या एक तिहाई से अधिक “हानिकारक” या “नशीली दवाओं पर निर्भर श्रेणी” में हैं। ऐसे लगभग एक तिहाई मामले उत्तर प्रदेश (10.7 लाख), पंजाब (7.2 लाख), हरियाणा (5.9 लाख), महाराष्ट्र (5.2 लाख) और दिल्ली से हैं। 

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, ड्रग्स विभिन्न चैनलों के माध्यम से सीमा पार अवैध बाजारों में प्रवेश करती हैं, भारत इसका प्रवेश मुख्य रूप से अफगानिस्तान के माध्यम से होता है। भारत में शामक अर्थात दर्द निवारक दवा को नशे के रूप में प्रयोग करने वाले लगभग 1.08 करोड़ उपयोगकर्ता हैं, जिनमें से सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश (19.6 लाख) में है, इसके बाद महाराष्ट्र (11.6 लाख), पंजाब (10.9 लाख) और आंध्र प्रदेश (7.4 लाख) हैं।

10.7 लाख उपयोगकर्ताओं के साथ कोकीन भारत में कम लोकप्रिय अवैध दवा है। काफी महंगा होने के कारण इसका इस्तेमाल ज्यादातर अमीर लोग करते हैं। अधिकांश कोकीन उपयोगकर्ता महाराष्ट्र (90,000), पंजाब (27,000), राजस्थान (10,000) और कर्नाटक (8,000) में हैं।

नशाखोरी युवा वर्ग को अपनी चपेट में ले रहा है

जिस मानव संसाधन के बल पर हम विश्व में अपना परचम फहराने के मंसूबे पाले हुए हैं, नशे के कारण उसकी धार कुंद हो रही है। नशे के काले कारोबारी उसकी नसों में ‘नीला जहर’ उड़ेल रहे हैं और धीरे-धीरे नशाखोरी युवाओं को अपनी गिरफ्त में लेती जा रही है। पिछले दिनों भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा कराए जा रहे शोध में यह बात सामने आई है कि तंबाकू का सेवन युवाओं के दिल का सबसे बड़ा दुश्मन है। लगभग 40 फीसद युवाओं में हार्ट अटैक का कारण तंबाकू सेवन बताया जा रहा है।

बच्चों में भी फैलता नशे का जहर

बच्चों द्वारा मादक द्रव्यों के सेवन पर बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए दिल्ली आयुक्त के एक अध्ययन के अनुसार, बाल अपराधों में सम्मिलित 100 प्रतिशत बच्चे मादक द्रव्यों के सेवन करने वाले थे, जबकि बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले 95.5 प्रतिशत बच्चे और गलियों में रहने वाले 93 प्रतिशत बच्चे नशीले पदार्थों का सेवन करते थे।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग 1 करोड बच्चे सूंघने वाले नशे कर रहे है जिनमे प्रमुख हैं, व्हाइटनर और सिलोचन जो की जूते चिपकाने, पंचर बनाने और फर्नीचर बनाने में काम आता है। एम्स दिल्ली के राष्ट्रीय औषधि निर्भरता उपचार केंद्र के एक शोध के अनुसार, सड़क पर रहने वाले 86 प्रतिशत बच्चों के परिवार के सदस्य मादक द्रव्यों के सेवन में लिप्त थे। वहीँ इंडिया टुडे डेटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) के विश्लेषण के अनुसार 0.58 प्रतिशत वयस्कों की तुलना में 1.17 प्रतिशत बच्चे नशे का सेवन करते हैं। इनमे लगभग 18 लाख वयस्क और 4.6 लाख बच्चे बुरी तरह नशे की श्रेणी में हैं। नशे की लत वाले सबसे ज्यादा बच्चे उत्तर प्रदेश (94,000), मध्य प्रदेश (50,000), महाराष्ट्र (40,000), दिल्ली (38,000) और हरियाणा (35,000) में हैं।

नशीली पदार्थों के सेवन के प्रमुख कारण :

  • संपन्न वर्ग द्वारा इसके सेवन को स्वीकार करना।
  • सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक एवं अन्य तनाव में वृद्धि।
  • युवा वर्ग द्वारा फैशन के रूप में उपयोग किया जाना।
  • नशे के लत की मानसिक गुलामी।
  • आसानी से उपलब्धता।
  • मादक पदार्थों का दुष्प्रभाव:
  • दुर्घटना, घरेलू तनाव, शारीरिक समस्याएँ तथा बढ़ने का खतरा।
  • यह आर्थिक संकट बढ़ाने के साथ सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है ।
  • परिवार एवं दोस्तों के साथ भावनात्मक और सामाजिक संबंधों को नुकसान पहुंचाता है।
  • मादक पदार्थों का उपयोग हमारे स्वास्थ्य, सुरक्षा, शांति और विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
  • मादक पदार्थों पर निर्भरता के कारण आत्मसम्मान में कमी, निराशा, आपराधिक कार्रवाई और यहाँ तक कि आत्मघाती प्रवृत्ति उत्पन्न हो सकती है।

मादक पदार्थों का दुष्प्रभाव

  • दुर्घटना, घरेलू तनाव तथा शारीरिक समस्याएँ बढ़ने का खतरा।
  • यह आर्थिक संकट बढ़ाने के साथ सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है ।
  • परिवार एवं  दोस्तों के साथ भावनात्मक और सामाजिक संबंधों को नुकसान पहुंचाता है।
  • मादक पदार्थों का उपयोग हमारे स्वास्थ्य, सुरक्षा, शांति और विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
  • मादक पदार्थों पर निर्भरता के कारण आत्मसम्मान में कमी, निराशा, आपराधिक कार्रवाई और यहाँ तक कि आत्मघाती प्रवृत्ति उत्पन्न हो सकती है।

नशे की लत के लक्षण

  • पीड़ित व्यक्ति को जब तक नशा न कर ले बेचैन और असामान्य बना रहता है।
  • नशे का आदी व्यक्ति में घबराहट, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, मानसिक थकावट, कमजोर स्मरणशक्ति, नींद न आना, सिर दर्द, शरीर में ऐंठन-मरोड़, भूख में कमी आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
  • डॉक्टर के बता देने के बाद भी नशे को करते रहना।
  • नशीले पदार्थों को खरीदने के लिए चोरी जैसे काम भी करना।
  • नशे में होने के बावजूद भी वाहन चलाना और अन्य गंभीर कार्य को करना।
  • नशे की लत के सामने आत्मसमर्पण कर देना ।
  • किसी भी प्रकार की दवाइयों का निश्चित समय की तुलना में लंबी अवधि तक सेवन करना।

नशीली दवाओं की लत से रोकथाम

  • नशीली दवाओं के दुरुपयोग के प्रति लोगों को शिक्षित किया जाना चाहिए।
  • तनाव से निपटने के स्वस्थ तरीके जानें जैसे व्यायाम, खेलकूद इत्यादि।
  • परिवार के सदस्यों, अच्छे मित्रों के साथ समय बिताएं।
  • अपने दोस्तों को सोच-समझकर चुनें।
  • नशे की लत का इलाज बीमारी के रूप में हो।
  • इलाज के गलत तरीकों से बचें।
  • मनोचिकित्सक और काउंसलर की मदद लेनी चाहिए।
  • कैम्पेन, सभा एवं नुककड़ नाटक जैसे जागरूकता कार्यक्रम चलने चाहिए।
  • सभी देशों को साथ आना चाहिए।
  • नशे के नुकसानों के शोध को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
  • मादक पदार्थों के सेवन को रोकने में चुनौतियाँ :
  • कानूनी रूप से उपलब्ध मादक पदार्थ
  • पुनर्वास/नशा मुक्ति केंद्रों की कमी
  • मादक पदार्थों की तस्करी

मादक पदार्थों की लत से निपटने हेतु सरकारी पहल

  • नवंबर 2016 में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (Narco-Coordination Centre- NCORD) का गठन किया गया और राज्य में ‘नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो’ की मदद के लिये ‘वित्तीय सहायता योजना’ को पुनर्जीवित किया गया।
  • नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को एक नया सॉफ्टवेयर विकसित करने हेतु धनराशि उपलब्ध कराई गई है, अर्थात् ज़ब्ती सूचना प्रबंधन प्रणाली (Seizure Information Management System – SIMS) ड्रग अपराधों और अपराधियों का पूरा ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करेगी।
  • सरकार द्वारा नारकोटिक ड्रग्स की अवैध ट्रैफिक से निपटने में आने वाले खर्च को पूरा करने हेतु ‘मादक पदार्थों के नियंत्रण के लिये राष्ट्रीय कोष’ (National Fund for Control of Drug Abuse) नामक फंड की स्थापना की गई जिसका उपयोग नशेड़ियों का पुनर्वास और नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जनता को शिक्षित आदि करने में किया जाता है।
  • सरकार एम्स के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (National Drug Dependence Treatment Centre) की मदद से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के माध्यम से भारत में मादक पदार्थों के दुरुपयोग को मापने हेतु एक राष्ट्रीय ड्रग सर्वेक्षण (National Drug Abuse Survey ) भी कर रही है।
  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वर्ष 2016 में उत्तर-पूर्वी राज्यों में बढ़ते एचआईवी के प्रसार से निपटने हेतु, विशेष रूप से ड्रग्स इंजेक्शन का प्रयोग करने वाले लोगों में इसके प्रयोग को रोकने हेतु ‘प्रोजेक्ट सनराइज़’ (Project Sunrise )को शुरू किया गया था।
  • द नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, (NDPS) 1985: यह किसी भी व्यक्ति द्वारा संपूर्ण भारत में मादक पदार्थ या साइकोट्रॉपिक पदार्थ के उत्पादन, बिक्री, क्रय, परिवहन, भंडारण, और / या उपभोग को प्रतिबंधित करता है।
  • सरकार द्वारा ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ (Nasha Mukt Bharat Abhiyan) को शुरू करने की घोषणा की गई है जो सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों पर केंद्रित है।
  • भारत सरकार ने एक राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर – 1800-11-0031 शुरू करके भारत में नशीली दवाओं के दुरुपयोग को नियंत्रित करने और शराब और नशीली दवाओं के दुरुपयोग करने वालों की मदद करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

मादक पदार्थों के खतरे पर नियंत्रण हेतु अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ और सम्मेलन:

  • भारत मादक पदार्थों के खतरे से निपटने हेतु निम्नलिखित अंतर्राष्ट्रीय संधियों और अभिसमयों का हस्ताक्षरकर्त्ता देश है:
  • नारकोटिक ड्रग्स पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) कन्वेंशन (1961)
  • साइकोट्रोपिक पदार्थों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (1971)।
  • नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक पदार्थों के अवैध यातायात के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (1988)।
  • ट्रांसनेशनल क्राइम (UNTOC), 2000 के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन।

संदर्भ (रेफ़्रेन्स References) :

Leave a Reply