वीर शहीद नीलांबर और पितांबर Nilamber and Pitamber

  • नीलांबर और पितांबर का नाम झारखंड के अग्रणी स्वतंत्रता सेनानियों में आता है| उनका जन्म लातेहार के चेमो- सेनया गांव में खरवार जनजाति के भोगता  समुदाय में हुआ था| उनके पिता चेमू सिंह एक जागीरदार थे| नीलांबर पीतांबर रांची के विश्वनाथ शाहदेव तथा पांडे गणपत राय के नेतृत्व मे हुए डोरंडा विद्रोह से काफी प्रभावित हुए| उन्होंने खुद को कंपनी से  स्वतंत्र होने का निर्णय लिया| चेरो जागीरदार देवी बख्श राय भी उनके साथ आ गए|
  • 21 अक्टूबर 1857 को नीलांबर पीतांबर के नेतृत्व में 500 लोगों ने ब्रिटिश हुकूमत के पक्षधर रहे चैनपुर के रघुवर दयाल के यहां  आक्रमण कर दिया| इसके उपरांत उन्होंने  लेस्लीगंज में अंग्रेजों का भारी नुकसान किया| अपने केवल 50 लोगों के साथ ले. ग्राहम उनके विरोध को रोक नहीं पाया और नीलांबर-पीतांबर के लोगों ने उसे रघुवर दयाल के घर में घेर लिया|
  • दिसंबर 1857 को मेजर कॉटर के नेतृत्व में आई दो कंपनियों ने देवी बख्श राय को गिरफ्तार कर लिया| नीलांबर-पीतांबर के नेतृत्व में पूरे पलामू क्षेत्र में अंग्रेजो के खिलाफ विरोध की ज्वाला धधक रही थी, जिन्हें स्थानीय जागीरदारों के साथ अन्य लोगों का समर्थन भी प्राप्त था| कमिश्नर डाल्टन ने इससे घबराकर विद्रोह को कुचलने का निर्णय लिया| उसने मद्रास इन्फेंट्री के 140 सैनिक, रामगढ़ घुड़सवार की छोटी टुकड़ी तथा पिठौरिया परगणैत के नेतृत्व जिसमें बंदुक्ची भी शामिल थे, को लेकर 16 जनवरी 1858 को पलामू के लिए कुच किया | 21 जनवरी को मनिका पहुंचे जहां पहुंचकर ले.ग्राहम से मिलकर दूसरे दिन पलामू किला से विद्रोह का नेतृत्व कर रहे नीलांबर-पीतांबर पर आक्रमण कर दिया| अंग्रेजों की सैन्य क्षमता होने के कारण नीलांबर पीतांबर को अपना तोप, भारी मात्रा में गोला-बारूद असबाब, रसद एवं मवेशियों को छोड़कर किले से हटना पड़ा|
  • डाल्टन को वहां बाबू कुंवर सिंह का एक पत्र मिला जिसमें उन्होंने विद्रोहियों को अविलंब सहयोग की बात लिखी थी | इस से घबराकर डाल्टन ने बाबू कुंवर सिंह के सहयोग से पहले ही विद्रोहियों को कुचलने की योजना बनाई तथा स्वयं लेस्लीगंज में रुक कर युद्घ तैयारी में लग गया| उसने युद्ध के लिए गोला बारूद तथा रसद जुटाए साथ ही स्थानीय जागीरदारों को सैन्य सहायता उपलब्ध कराने का हुक्म दिया| बहुत सारे जागीरदारों ने उसकी बात मान ली परंतु पलामू राजा से संबंध रखने वाले प्रमुख चेरो जागीरदार भवानी बक्श राय ने नीलांबर-पीतांबर के समर्थन का निर्णय लिया|
  • 10 फरवरी को डाल्टन ने विद्रोहियों पर कार्यवाही करने के लिए ले. ग्राहम तथा देव राजा को हरिनामाड गांव भेजा परंतु उनके पहुंचने के पहले ही विद्रोही वहां से निकल चुके थे| फिर भी अंग्रेजों ने 3 विद्रोहियों को पकड़ लिया जिनमें से दो को तत्काल फांसी दी गई तथा एक को विद्रोहियों का रास्ता बताने के लिए साथ ले गए| डाल्टन ने विद्रोही बंदी के सहयोग से 13 फरवरी 1858 को नीलांबर पीतांबर के जन्म भूमि में प्रवेश किया| अंग्रेजी सेना को कोयल नदी पार करते देखनीलांबर-पीतांबर के दल ने चामू गांव छोड़ जंगली टिलहों में शरण ली तथा वहीं से छिपकर वार करने लगे| इस वार से रामगढ़ सेना का एक दफादार मारा गया| दूसरी तरफ शाहपुर एवं बाघमारा घाटी में डटे विद्रोहियों से भी अंग्रेजी सेना का मुकाबला हुआ।
  • यहां से भी नीलांबर पीतांबर के बच निकलने के खिन्न होकर डाल्टन ने 12 फरवरी को चेमू सेनया स्थित नीलांबर-पीतांबर के गढ़ सहित पूरे गांव में लूटपाट कर सभी घरों को जला दिया| इस कार्यवाही से डरकर पलामू के जागीरदारों ने नीलांबर पीतांबर को सहयोग देना बंद कर दिया| चेरो जाति से अलग हुए खरवार-भोगताओं पर 8 फरवरी से 23 फरवरी तक लगातार हमले किए गए| जासूसों की सूचनाओं पर अंग्रेजी सेना ने नीलांबर-पीतांबर को उनके एक संबंधी के यहां से गिरफ्तार कर लिया| उन पर बिना मुकदमा चलाए ही 28 मार्च 1859 को लेस्लीगंज में फांसी दे दी गई|

नीलांबरपीताम्बर के नाम पर विश्वविद्यालय

  • नीलांबरपीताम्बर विश्वविद्यालयमेदिनीनगरझारखंड, भारत में स्थित एक राज्य विश्वविद्यालय है। नीलांबर-पीताम्बर विश्वविद्यालय मेदिनीनगर, झारखंड, भारत में स्थित एक राज्य विश्वविद्यालय है। झारखंड के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक है जो पलामू जिले के साथ-साथ गढ़वा, लातेहार आदि जैसे आसपास के अन्य जिलों में सभी कॉलेजों का प्रबंधन और संचालन करता है। यह एक स्वायत्त संस्थान है।
  • 17 जनवरी 2009 में स्थापित इस विश्वविद्यालय केद्वारा सामान्य स्नातक, तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रम जैसे दंत चिकित्सा, पत्रकारिता, इंजीनियरिंग और बी.एड के अलावा 15 स्नातकोत्तर विभागों का संचालन किया जाता है । 

नीलांबरपीताम्बर के नाम पर सरकारी योजना  : नीलांबरपीताम्बर जल समृद्धि योजना का परिचय (Nilamber Pitamber Jal Samriddhi Yojana 2020)

  • 4 मई 2020 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित नीलांबर-पीतांबर जल समृद्धि योजना का शुभारंभ किया।
  • नीलांबर-पीतांबर जल समृद्धि योजना के तहत जल संरक्षण की विभिन्न संरचनाओं का निर्माण कर राज्य की वार्षिक जल संरक्षण क्षमता में पांच लाख करोड़ लीटर जल की वृद्धि का लक्ष्य है।
  • योजना के अंतर्गत 5 लाख एकड़ बंजर भूमि का संवर्धन किया जाएगा।
  • योजना के अंतर्गत मनरेगा के तहत 10 करोड़ मानव दिवस का सृजन होगा।

References:

bhaskar.com/news/latest-garhwa-news-022015-2469295.html

https://web.archive.org/web/20190306043526/https://www.prabhatkhabar.com/news/ranchi

en.wikipedia.org/wiki/Nilamber_and_Pitamber

https://www.graduationcourse.in/nilamber-pitamber-jal-samriddhi-yojana/

https://www.edristi.in/hi/

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