राष्ट्र निर्माण में युवाओं का योगदान Role of Youth in Nation Building

युवा काल (Youth Age)

युवा काल मानव जीवन मे सबसे उर्जावान तथा सम्भावनाओं से भरी अवस्था है. युवा शब्द सुनते ही जीवंतता, उत्साह और जूनून का अनुभव होने लगता है. युवा किसी भी देश की आबादी का सबसे महत्वपूर्ण एवं गतिशील हिस्सा होते है. उनमें देश को बदलने की व्यापक सलाहियत होती है, यदि उन्हें उचित शिक्षा एवं अवसर प्रदान किया जाए तो वे देश को विकास की ऊंचाई तक ले जाने की क्षमता रखते हैं. स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि युवा राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है. देश को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, प्रशासनिक तथा अन्य क्षेत्रों में अग्रणी बनाने में युवाओं की दृढ़ शक्ति, पराक्रम, धैर्य एवं संयम की आवश्यकता पड़ती है.

युवाओं ने अपने कौशल, पराक्रम और बुद्धिमत्ता से देश को विकास और उन्नति के पथ पर अग्रसर करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. यह व्यापक रूप से स्वीकृत तथ्य है कि युवाओं में सीखने की सबसे अधिक क्षमता होती है. समाज में जानकारी एवं जागरूकता फैलाने में युवा एक सशक्त माध्यम की भूमिका अदा करते हैं. जब हम युवाओं की बात करते हैं तो तेज-तर्रार, गुस्से में गर्जन करने वाला, बोझ उठाने वाला, परिवर्तन का वाहक जैसे विशेषण उन पर पूरी तरह से फिट बैठते हैं. सामाजिक कुरीतियों से लड़ने के साथ ही आर्थिक एवं राजनीतिक बदलाव के वाहक बनने की सलाहियत के कारण राष्ट्र के निर्माण मे युवा पीढ़ी की भूमिका सर्वोपरि होती है.

कौन है युवा (Who is Youth)

संयुक्त राष्ट्र ने जहाँ पंद्रह से चौबीस वर्ष (15-24) के आयु वर्ग को युवा माना है वहीं राष्ट्रीय युवा नीति 2014 के अनुसार भारत मे युवा का अर्थ पंद्रह से उन्नतीस (15-29) वर्ष की आयु वर्ग को माना जाता है. पड़ोसी देश नेपाल इस मामले मे थोड़ा लचीला है जहां के सोलह से चालीस वर्ष (16-40) वाले युवा की श्रेणी मे आते हैं. भारत सरकार के स्वास्थ मंत्रालय की तकनीकी समिति के जनसंख्या प्रक्षेपण रिपोर्ट के अनुसार सन 2011 की जनगणना के आधार पर शुन्य से चौदह वर्ष (0-14) एवं 24 वर्ष तक या उससे कम आयु की आबादी देश की कुल आबादी के 50.1 प्रतिशत थी. वर्तमान मे यदि 35 वर्ष को आधार माना जाए तो यह प्रतिशत 65 के आस पास हो गई है.

भारत को युवा आबादी का लाभ (Benefits of Young Population to India)

वर्तमान मे जहाँ चीन,जापान सहित यूरोपिये देशों मे आबादी बूढी़ हो चली है वहीं सबसे बड़े युवा देश भारत को इसका लाभ लेने का अवसर है. यदि इस उर्जावान एवं उत्साहित समूह मे मूल रूप से एक टीम भावना के साथ तर्कसंगत जोखिम लेने वाले रवैये विकसित किए जाएं तो परिणाम काफ़ी साकारात्मक आ सकते हैं. युवाओं मे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को नैतिक तथा राष्ट्रीयता की भावना के साथ मिश्रित करने हेतु शिक्षा प्रणाली मे व्यापक सुधार किए जाने से एक ज़िम्मेदार, सजग तथा विकासशील नागरिक की फौज तैयार की जा सकती है. उनमे देश-प्रेम का भाव विकसित करने, भ्रष्टाचार के विरुद्ध खड़ा होने, कमजोरों के नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने, लैंगिक समानता की रक्षा करने तथा अन्याय से लड़ने का साहस विकसित करने के लिए सामाजिक, नैतिक और अध्यात्मिक बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है तभी भारत मानवों की एक श्रेष्ठ प्रजाति विकसित कर सकता है जो आने वाले समय मे देश को वैश्विक शक्ति बनाने में योगदान दे सकते हैं.

अतीत मे युवा-शक्ति का योगदान (Contribution of youth power in the past)

हमारे देश के युवाओं ने अतीत में भी राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है. युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद ने पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का परचम लहराया था. उनके द्वारा 11 सितंबर 1893 में शिकागो में आयोजित धर्म संसद में दिए ऐतिहासिक भाषण ने भारत के अध्यात्मिक दर्शन से पश्चिमी सभ्यता को अवगत कराया. उन्होंने वहां के लोगों को एहसास कराया कि भारत निरक्षरों का देश नहीं है बल्कि इसका अतीत एक विश्वगुरू का रह चुका है. उनका मानना था कि एक भीड़ जो काम सदियों मे नही कर सकती वह काम कुछ सच्चे, इमानदार और उर्जावान पुरुष एवं महिलाएं एक वर्ष मे ही कर सकते हैं. उन्होने युवाओं को आहवान किया कि लक्ष्य तक पहुंचने के लिए उठो, जागो और रुको नही. उनका यह भी मानना था कि भविष्य की आशा चरित्रवान युवाओं मे निहित है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने केवल 25 वर्ष की आयु मे ही दक्षिण अफ्रीका मे मूल अफ्रीकियों तथा भारतीय नागरिकों के खिलाफ हो रहे नस्लिय भेदभाव के विरुद्ध अहिंसात्मक आंदोलन की शुरुआत की वहीं भगत सिंह, हरि शिवाराम राजगुरु व सुखदेव थापर, तीनो ने केवल अपने 23 वर्ष की आयु मे ही जानों की आहुति देकर देश को आज़ाद कराने मे उल्लेखनीय योगदान दिया था. वहीं 1906 मे जन्मे चंद्रशेखर तिवारी “आज़ाद” ने लगभग इसी आयु मे अपने जान की कुर्बानी देकर युवा क्रान्तिकारियों मे जोश भर दिया था. राम प्रसाद बिसमिल (30 वर्ष), अशफ़ाकुल्ला खाँ (27 वर्ष), राजेन्द्र नाथ लाहिरी (26 वर्ष) और ठाकुर रौशन सिंह (35 वर्ष) जैसे अनगिनत युवाओं की कुर्बानियों ने स्वतंत्र भारत की नीव रखी.

पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 21 वर्ष की युवावस्था मे ही (सन 1910) एक उभरते सितारे की तरह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी पहचान बना ली थी. मौलाना अबुल कलाम आजाद ने केवल 17 वर्ष (1905) की आयु मे ही बंगाल विभाजन के विरोध में अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों मे योगदान देना प्रारंभ कर दिया था वहीं सुभाष चंद्र बोस ने महज 24 वर्ष की आयु में ही ( 1921) प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन का विरोध कर अंग्रेजों को ललकारा था जिसके कारण उन्हें 6 माह के जेल की सजा दी गई थी.

आधुनिक भारत मे युवाओं का योगदान (Contribution of Youth in Modern India)

आजादी के बाद भी भारतीय युवाओं ने आर्थिक, सांस्कृतिक, अनुसंधान, खेल-कूद इत्यादि क्षेत्रों में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पटल पर देश का मान बढ़ाया है. अभिनव बिंद्रा, सचिन तेंदुलकर, मिल्खा सिंह, एम एस धोनी, मैरी कॉम, विश्वनाथन आनंद, लिएंडर पेस सरीखे खिलाड़ियों ने जहाँ खेल के क्षेत्र मे देश का परचम लहराया वहीं मुकेश अंबानी (व्यवसाय), ऐश्वर्या राय, सुष्मिता सेन, प्रियंका चोपड़ा और ए आर रहमान ने मनोरंजन, अरुंधति रॉय एवं चेतन भगत ने साहित्य मे अपनी प्रतिभा एवं परिश्रम के बल पर देश का नाम आगे बढ़ाया है.
देश के बाहर बसे भारतीय मूल के युवाओं ने भी देश का मान एवं सम्मान बढ़ाने में कोई कसर नहीं बछोड़ी है. इस फेहरिस्त में गूगल सीईओ सुंदर पिचाई, अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला, पेप्सिको की निवर्तमान सीईओ इंदिरा नूई का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं.

युवाओं के समक्ष चुनौतियां (Chanllenges Before Youth)

हालांकि आज के युवा-वर्ग मे पिछली पीढ़ियों की तुलना मे अधिक व्यक्तिगत स्वतन्त्रता है इसके बावजूद उनके समक्ष चुनौतियों एवं दबाव की कमी नही है. संगी-साथियों का प्रभाव, माता-पिता की अपेक्षाओं, परीक्षा का दबाव, सोशल मीडिया की चमक-दमक, स्वास्थ्य की समस्या तथा उपभोक्तावादी संस्कृति जैसे अनेक कारक युवा-वर्ग के सामने चुनौतियां बन कर खड़े हैं. व्यक्तिगत नैतिकता, धार्मिक मान्यता तथा सार्वजनिक व्यवहार भी इस वर्ग को मिली अत्याधिक स्वतंत्रता तथा विकल्पों के कारण प्रभावित करती हैं. ऐसी स्थिति मे पारिवार तथा सामाजिक स्तर पर मिलने वाला भावनात्मक सहयोग काफी हद तक उन्हें भटकने से रोकने मे कारगर हो सकता है.
युवाओं का उत्थान कैसे हो (How to Uplift Youth)
सरकारी स्तर पर बनने वाली योजनाओं मे युवा वर्ग से जुड़े विषयों मसलन शिक्षा एवं प्रशिक्षण, रोज़गार एवं उद्यमिता, स्वास्थ्य एवं कल्याण, कला एवं संस्कृति, खेलकूद एवं स्पर्धा इत्यादि को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है. युवाओं के लिए बनने वाली योजनाओं मे सभी प्रमुख हितधारकों जैसे सरकार, समाज, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की सहभागिता की सकारात्मक सहमति आवश्यक है.
निश्चित ही इतने बड़े मानव संसाधन का उपयोग कर भारत विश्व के अग्रणी देशों की कतार मे खड़ा हो सकता है. युवा शक्ति को उचित मार्गदर्शन करने के साथ-साथ उनकी क्षमता के सदुपयोग करने की आवश्यकता है. ऐसी असंख्य योजनाए हैं जिसके माध्यम से तकनीकी दक्षता, कौशल विकास और रोज़गार के समुचित अवसर उपलब्ध करा के स्वदेशी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है जिससे न केवल आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा अपितु निर्यात के क्षेत्र मे भी व्यापक विकास संभव है.

युवाओं के उत्थान मे सरकारी पहल (Government Initiatives in Upliftment of Youth)

भारत सरकार युवाओं के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं चला रही है. इनमें प्रमुख हैं प्रधानमंत्री युवा रोजगार योजना, स्किल इंडिया मिशन, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया मिशन, स्टार्टअप इंडिया, फिट इंडिया मूवमेंट, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, खेलो इंडिया, सीखो और कमाओ, नई मंजिल, हमारी धरोहर, मौलाना आजाद नेशनल फैलोशिप फॉर माइनॉरिटी स्टूडेंट्स तथा कई राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय छात्रवृत्ति योजनाएं. यदि इन योजनाओं को ईमानदारी के साथ धरातल पर लाया जाए तो निश्चित ही युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा.

इसके साथ ही भारत सरकार के युवा मामलों और खेल मंत्रालय के लिए कुल केंद्रीय बजट मे युवाओं मे खेल के प्रोत्साहन के लिए आवंटन का प्रावधान किया गया है. युवा कल्याण योजनाओं जैसे राष्ट्रीय सेवा योजनाओं, नेहरू युवा केंद्र आदि के साथ ही खेलों के प्रचार के लिए अर्जुन पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कार जैसे पुरस्कारों के लिए आवंटन शामिल हैं. खेल को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया तथा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी आॅफ नाॅर्थ ईस्ट इत्यादि संस्थानों के लिए भी राशि आवंटित किए गए हैं.

Reference :
hindikiduniya.com/essay/essay-on-role-of-youth-in-nation-building/
hindi.theindianwire.com/राष्ट्र-निर्माण-युवा-164192/
bhaskar.com/news/PUN-OTH-MAT-latest-banga-news-202003-998767-NOR.html

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