नई शिक्षा नीति (New Education Policy) 2020

नई शिक्षा नीति 2020 भारत की शिक्षा नीति है जिसे भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को घोषित किया गया। सन 1986 में जारी हुई नई शिक्षा नीति के बाद भारत की शिक्षा नीति में यह पहला नया परिवर्तन है। यह नीति अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित है।

पृष्ठभूमि

भारत में शिक्षा-प्रणाली को व्यवस्थित करने का काम 1948 में डॉ॰ राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के गठन के साथ ही शुरू हो गया था।

1952 में लक्षमणस्वामी मुदलियार की अध्यक्षता में गठित माध्यमिक शिक्षा आयोग तथा 1964 में दौलत सिंह कोठारी की अध्यक्षता में गठित शिक्षा आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर 1968 में शिक्षा नीति पर एक प्रस्ताव प्रकाशित किया गया जिसमें ‘राष्ट्रीय विकास के प्रति वचनबद्ध, चरित्रवान तथा कार्यकुशल’ युवक-युवतियों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया।

मई 1986 में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई, जो अब तक चल रही है। इस बीच राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समीक्षा के लिए 1990 में आचार्य राममूर्ति की अध्यक्षता में एक समीक्षा समिति, तथा 1993 में प्रो. यशपाल समिति का गठन किया गया। 

नई शिक्षा नीति : प्रमुख बातें

(१) नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत वर्ष 2030 तक सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio-GER) को 100% लाने का लक्ष्य रखा गया है।

(२) नई शिक्षा नीति के अन्तर्गत शिक्षा क्षेत्र पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 6% हिस्से के सार्वजनिक व्यय का लक्ष्य रखा गया है जो इस समय 4.43% है।

(३) ‘मानव संसाधन प्रबंधन मंत्रालय’ (HRD Ministry) का नाम परिवर्तित कर ‘शिक्षा मंत्रालय’ (Ministry of Education) कर दिया गया है।

(४) पाँचवीं कक्षा तक की शिक्षा में मातृभाषा/स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा को शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनाने पर बल दिया गया है। साथ ही मातृभाषा को कक्षा-8 और आगे की शिक्षा के लिये प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है।

(५) इसमें समस्त उच्च शिक्षा (कानूनी एवं चिकित्सीय शिक्षा को छोड़कर) के लिए एक एकल निकाय के रूप में भारत उच्च शिक्षा आयोग का गठन करने का प्रावधान है। 

नई शिक्षा नीति में संरचनात्मक परिवर्तन

विद्यालय शिक्षा

10+2 मॉडल को 5+3+3+4 मॉडल द्वारा बदल दिया गया है। यह निष्पादन कुछ इस प्रकार से किया जाएगा:

  • फाउंडेशनल स्टेज (5 साल) इसमें तीन साल की प्री-स्कूलिंग के साथ कक्षा 1-2 शामिल होगी।
  • प्रारंभिक चरण (3 साल) यह 8-11 वर्ष की आयु के साथ, कक्षा 3-5 शामिल होगी।
  • मध्य चरण (3 साल) यह 11-14 वर्ष की आयु के साथ , कक्षा 6-8 शामिल होगी।
  • माध्यमिक चरण (4 साल) यह 14-19 वर्ष की आयु के साथ, कक्षा 9-12 शामिल होगी।

उच्च शिक्षा

  • स्नातक कार्यक्रम एक लचीले निकास के साथ 4 साल का कार्यक्रम होगा। अगर किसी कारणवश कोई छात्र अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ देता है तो उसे मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम के तहत फायदा होगा| अगर आपने एक साल पढ़ाई की है तो सर्टिफिकेट, दो साल की है तो डिप्लोमा मिलेगा।तीन या चार साल के बाद डिग्री दी जाएगी| अब बीमार होने या शादी हो जाने के कारण किसी को पढ़ाई नहीं छोड़नी पड़ेगी|
  • अगर ग्रेजुएशन का कोर्स करते समय, किसी भी वजह से विद्यार्थी को अगर बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़े तो क्रेडिट ट्रांसफर के तहत, फिर से डिग्री कोर्स पूरा करने का अवसर मिलेगा।
  • अगर विद्यार्थी को यह मह्सूस हो कि वह किसी दूसरे स्ट्रीम में जाना चाहता है, तो उन्हें विशेष प्रकार के सर्टिफिकेट दिए जाएँगे।
  • जो छात्र रिसर्च/पी.एच.डी. स्तर जाना चाहते हैं उनके लिए चार साल का डिग्री कोर्स होगा। जो लोग जॉब में जाना चाहते हैं वो3 साल का ही डिग्री कोर्स करेंगे।
  • एम.फिल.के पाठ्यक्रमों को बंद कर दिया जाएगा । 

शिक्षकों की शिक्षा और भर्ती

  • शिक्षकों के लिए 4-वर्षीय एकीकृत बी.एड कार्यक्रम को अनिवार्य बना दिया।
  • विभिन्न शिक्षण सहायक सामग्री के संबंध में शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए कार्यशालाएँ आयोजित की जानी चाहिए।
  • शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए क्योंकि छात्रों के विकास के लिए एक शिक्षक ही केंद्रीकृत भूमिका में हैं।

शिक्षा नियामक परिषद/ अन्य परिवर्तन: 

  • ट्रांसफर ऑफ क्रेडिट की सुविधा के लियेएकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (Academic Bank of Credits) की स्थापना पर ज़ोर दिया जाएगा।
  • आई.आई.टी. वआई.आई.एम. केसाथ ही बहुविषयक शिक्षा और अनुसंधान विश्वविद्यालयों (Multidisciplinary Education and Research Universities – MERUs) को देश में वैश्विक मानकों के सर्वोत्तम बहु-विषयक शिक्षा के मॉडल के रूप में स्थापित किया जाएगा।
  • अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने और उच्च शिक्षा केशीर्ष निकाय के रूप में राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (National Research Foundation) का निर्माण किया जाएगा।
  • उच्च शिक्षा के लिये (चिकित्सा और कानूनी शिक्षा को छोड़कर ) एकल संयुक्त निकाय के रूप में भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग (The Higher Education Council of India ) को स्थापित किया जाएगा। सार्वजनिक और निजी उच्च शिक्षा संस्थानों के विनियमन, मान्यता और शैक्षणिक मानकों के लिये समान मानदंड होंगे। इसके अलावा, एच.ई.सी.आई. में चार स्वतंत्र भाग होंगे :
  1. विनियमन के लिये राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामक परिषद (National Higher Education Regulatory Council – NHERC),
  2. मानक सेटिंगके लिये सामान्य शिक्षा परिषद (General Education Council -GEC),
  • वित्त पोषणके लिये उच्च शिक्षा अनुदान परिषद (Higher Education Grants Council -HEGC),
  1. मान्यता प्रदान करने के लिये राष्ट्रीय प्रत्यायन परिषद (National Accreditation Council -NAC)।

लाभ:

  • नई शिक्षा नीति शिक्षार्थियों के एकीकृत विकास पर केंद्रित है।
  • परीक्षाएं केवल 3, 5 और 8वीं कक्षा में आयोजित की जाएंगी, अन्य कक्षाओं का परिणाम नियमित मूल्यांकन के तौर पर लिए जाएंगे। बोर्ड परीक्षा को भी आसान बनाया जाएगा और एक वर्ष में दो बार आयोजित किया जाएगा ताकि प्रत्येक बच्चे को दो मौका मिलें।
  • अबसे आर्ट, म्यूज़िक, क्राफ्ट, स्पोर्ट्स, योग जैसे सब्जेक्ट मुख्य पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे| इन्हें एक्स्ट्रा – करिकुलर एक्टिविटीज से हटाया जायेगा|
  • बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए ई-माध्यमों को बढ़ावा मिलेगा और सबको इंटरनेट से जोड़ने की कोशिश है| इसके लिए नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम (एनईटीएफ) बनाया जायेगा|
  •  इसके अलावा सभी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए हर पांच साल में स्कूल की जांच होगी|
  • राज्य और केंद्र सरकार दोनों शिक्षा के लिए जनता द्वारा अधिक से अधिक सार्वजनिक निवेश की दिशा में एक साथ काम करेंगे, और जल्द से जल्द जीडीपी को 6% तक बढ़ाएंगे।
  • नई शिक्षा नीति सीखने के लिए पुस्तकों का भोझ बढ़ाने के बजाय व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ाने पर ज्यादा केंद्रित है।
  • एनईपी यानी नई शिक्षा निति सामान्य बातचीत, समूह चर्चा और तर्क द्वारा बच्चों के विकास और उनके सीखने की अनुमति देता है।
  • नेशनल टेस्टिंग एजेंसी(एनटीए) राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालयों के लिए एक आम प्रवेश परीक्षा आयोजित करेगा।
  • छात्रों को पाठ्यक्रम के विषयों के साथ-साथ सीखने की इच्छा रखने वाले पाठ्यक्रम का चयन करने की भी स्वतंत्रता होगी, इस तरह से कौशल विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
  • “परख”, निकाय की स्थापना की जायेगी जो छात्रों के प्रदर्शन का आकलन करेगा।
  • एनईपी 2020 स्कूली बच्चों को खुली स्कूली शिक्षा प्रणाली के माध्यम से मुख्य धारा में वापस लाएगा।
  • शिक्षण, मूल्यांकन, नियोजन, प्रशासन को बढ़ाने के लिये प्रौद्योगिकी के उपयोग परविचारों के मुक्त आदानप्रदान के लिये एक मंच प्रदान करने के लिये एक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम (NETF) का निर्माण किया जाएगा।
  • छात्रों की शिक्षा स्तर का आकलन करने के लिये राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र- ‘PARAKH’ बनाया गया है।
  • यह शिक्षानीतिविदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
  • यह वंचित क्षेत्रों और समूहों के लियेलिंग समावेश निधि (of Gender Inclusion Fund) तथा विशेष शिक्षा क्षेत्रों की स्थापना पर ज़ोर देती है।
  • आने वाली नई शिक्षा नीति में बच्चों को लाइफ स्किल से जोड़ने का प्रयास किया जायेगा| इसमें खास तौर से उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षाओं को शामिल किया जायेगा|
  • पाली, फारसी और प्राकृत के लिये राष्ट्रीय संस्थान,भारतीय अनुवाद एवं व्याख्या संस्थानकी स्थापना की जाएगी। राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 ( एन ई पी 2020) ओपन स्कूलिंग प्रणाली के माध्यम से 2 करोड़ स्कूली बच्चों को मुख्य धारा में वापस लाएगा।

नुकसान:

  • भाषा का कार्यान्वयन यानि क्षेत्रीय भाषाओं में जारी रखने के लिए 5वीं कक्षा तक पढ़ाना एक बड़ी समस्या हो सकती है। बच्चे को क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाया जाएगा और इसलिए अंग्रेजी भाषा के प्रति कम दृष्टिकोण होगा, जो 5वीं कक्षा पूरा करने के बाद आवश्यक है।
  • बच्चों को संरचनात्मक तरीके से सीखने के अधीन किया गया है, जिससे उनके छोटे दिमाग पर बोझ बढ़ सकता है।

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https://hi.wikipedia.org/wiki/

https://www.drishtiias.com/

https://indiascheme.com/national-education-policy/

https://www.aajtak.in/

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